Ghazal

in #prameshtyagi8 years ago

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यकीं तुझसे उठा मेरा, मेरी ....आँखों में पानी है !
मुहब्बत बेवफ़ा ग़र हो तो कैसी.....ज़िन्दगानी है !!

हमारी चाहतों का क़त्ल उसने कर दिया बेशक !
मगर हमको नहीं उंगली कभी उस पर उठानी है !!

तुझे मैं याद आँऊगा तू रोयेगा ... सिसकर फिर !
अभी क्या है अभी तो पास तेरे ये.....जवानी है !!

पकड़ लेना सभी के सामने तुम ...हाथ ग़र चाहों !
अभी दिल से अलग है हम मगर रस्में निभानी है !!

संमदर एक था जिसमें सफर दोनो रहे करते !
किनारा मिल गया तुझको मुझे कस्ती डुबानी है !!

फक़त इतनी गुज़ारिश है चले आओं ज़रा तुम भी !
मुहब्बत की ये अर्थी है हमें .....मिलकर उठानी है !!