
सद्गुरु: अगर आप अकेले हैं और बोर हो रहे हैं, तो निश्चित रूप से आप खराब संगत में हैं। दिन बीतते-बीतते अगर आप बहुत दुखी महसूस करने लगे हैं, तो आप बहुत ही बुरी संगत में हैं।
बुनियादी सवाल यह है कि ‘मेरी समस्या क्या है? मेरे हाथ-पैर सलामत हैं, मैं देख सकता हूं, सुन सकता हूं, सूंघ सकता हूं, चख सकता हूं, फिर मुझे क्या परेशानी है?’ मगर समस्या यही है। यह आप तभी जान पाएंगे, जब आप अकेले बैठेंगे। जब आपके आस-पास लोग होंगे, तो आपको बहाना मिल जाएगा। जब आप किसी के साथ होते हैं, तो यह कहना आसान होता है कि ‘यह शख्स बहुत बेकार है, इसलिए मैं परेशान हूं। वह ठीक नहीं है, यह ठीक नहीं है।’ लेकिन जब अकेले बैठने पर भी यह समस्या बनी रहती है, तो आप जान जाते हैं कि समस्या का स्रोत कहां है।
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